भूमिका
Ek Tarfa Pyar Story in Hindi
पहला प्यार…
उम्र चाहे कितनी भी बढ़ जाए, लेकिन दिल के किसी कोने में उसकी महक हमेशा ताज़ी रहती है।
कुछ कहानियाँ शायद शुरू भी नहीं होतीं, और फिर भी जिंदगी भर साथ चलती रहती हैं।
यह मेरी भी ऐसी ही एक Ek Tarfa Pyar Story in Hindi है —
एक ऐसी कहानी, जिसकी शुरुआत स्कूल से हुई और जो आज भी मेरी यादों में ज़िंदा है।
साल 2008 – जब जिंदगी का पहला मोड़ आया
क्या एकतरफा प्यार सच में सच्चा होता है?
साल था 2008।
मैं तब एक बिल्कुल आम, सीधा-साधा स्कूल स्टूडेंट था।
न मैं क्लास का हीरो था, न स्पोर्ट्स का चैंपियन।
बस एक ऐसा लड़का, जो हर चीज़ दिल से महसूस करता था।
मेरी दुनिया छोटी थी—
स्कूल, कुछ दोस्त, थोड़ी शरारतें और ढेर सारी मासूमियत।
मुझे क्या पता था कि बहुत जल्द एक लड़की मेरी इस छोटी सी दुनिया को पूरी तरह बदल देगी।
वो दिन… जब पहली बार नजरें मिलीं
वो क्लास में नई आई थी।
पीले रंग का सलवार-सूट, दो चोटी, और उनमें बंधा नीला रिबन…
आज भी जैसे सामने हो।
मैं आगे की बेंच पर और वो पीछे।
टीचर बोर्ड की तरफ देखते, और मैं मौका मिलते ही उसकी तरफ।
और फिर एक दिन—
हमारी नजरें टकराईं।
सिर्फ तीन सेकेंड।
पर मेरे लिए जैसे समय वहीं थम गया।
वो मासूम सी नजरें आज भी मेरी यादों में सबसे खूबसूरत तस्वीर हैं।
और शायद उसी पल मेरा ek tarfa pyar शुरू हो गया था।
कुछ एहसास, जो प्यार नहीं थे… पर शायद वही प्यार थे
उस उम्र में प्यार का मतलब भी ठीक से समझ नहीं आता।
लेकिन जो मैं महसूस करता था, वो बाकी सब से बिल्कुल अलग था।
अब स्कूल जाने की असली वजह पढ़ाई नहीं—
वो बन चुकी थी।
उसकी एक झलक…
उसकी मुस्कान…
उसके बात करने का तरीका…
सब मेरे लिए किसी कविता जैसा था।
मैंने कितनी बार सोचा उससे बात करूँ,
पर हर बार डर जीत जाता।
“अगर उसने मना कर दिया तो…?”
यह एक सवाल मेरी सारी हिम्मत खा जाता था।
उसकी छोटी-छोटी बातें, जो मेरी पूरी दुनिया थीं
एक दिन उसकी पेन गिर गई।
मैंने उठाकर दिया।
उसने मुस्कुराकर कहा—
“Thank you”
बस इतना ही, और दिल मानो आसमान में उड़ने लगा।
मैंने एक डायरी बनानी शुरू कर दी थी।
हर दिन उसकी कोई ना कोई बात उसमें लिखता।
“आज उसने बाल खुले छोड़े थे…”
“आज उसने नीली बिंदी लगाई थी…”
वो नहीं जानती थी कि कोई है,
जो उसकी एक हँसी के लिए हर रोज़ जीता है।
यह सच में एक सच्ची Ek Tarfa Pyar Story in Hindi बन चुकी थी।
दोस्तों के बीच छुपा प्रेम
मेरे कुछ दोस्तों को पता था कि मैं उसे पसंद करता हूँ।
वो मुझे चिढ़ाते थे, लेकिन मेरा मज़ाक कभी नहीं उड़ाते थे।
वो भी ज्यादा बोलती नहीं थी।
अकेली बैठती।
किताबों में खोयी रहती।
मैं कभी ये सोचकर परेशान नहीं हुआ कि वो मुझे पसंद करती है या नहीं।
मेरे लिए उसे बस दूर से देखना ही काफी था।
ये प्यार नहीं था…
बल्कि उससे भी ज्यादा कुछ था।
एक ऐसी भावना जिसे शब्दों में बाँधना मुश्किल है।
वो दिन जब उसकी आँखों में आँसू देखे…
एक दिन मैंने देखा, वह चुपचाप रो रही थी।
शायद घर में कुछ हुआ था,
या स्कूल में किसी ने कुछ कह दिया।
मैं उसे देखता रहा…
दिल चीख रहा था कि जाकर पूछूँ—
“क्या हुआ? सब ठीक है ना?”
लेकिन हिम्मत फिर साथ नहीं दी।
मैं बस दूर खड़ा उसे देखता रहा।
उस दिन मैंने मन ही मन वादा कर लिया—
अगर कभी कुछ बन पाया,
तो सबसे पहले उससे कहूँगा कि मैं उसके लिए क्या महसूस करता हूँ।
साल बदलते गए… हम बड़े होते गए
10वीं आ गई।
बोर्ड की पढ़ाई बढ़ रही थी।
वो और सीरियस हो चुकी थी।
लेकिन मेरी feelings?
वो पहले से ज़्यादा गहरी हो चुकी थीं।
मुझे उसकी हर बात याद थी—
कौन सा डे्रेस किस दिन पहनती है,
बस किस टाइम जाती है,
कौन सी बेंच पर बैठती है…
ये सब मुझे याद रहता था,
और मुझे लगता था—
शायद यही सच्चा ek tarfa pyar होता है।
10वीं का आखिरी दिन – जो आज भी याद है
फेयरवेल था।
सब फोटो ले रहे थे।
हँसी-मजाक कर रहे थे।
और वो…
नीली साड़ी में इतनी खूबसूरत लग रही थी
कि नज़रें हटाना मुश्किल था।
मैंने तय किया था—
आज बात करूँगा।
आज जरूर करूँगा।
लेकिन…
वो जल्दी चली गई।
शायद कोई लेने आ गया था।
और मैं?
बस उसको जाते हुए देखता रह गया।
कुछ कहने की शुरुआत ही नहीं हुई थी…
और कहानी वहीं खत्म हो गई।
हम बिछड़ गए… बिना कुछ कहे
10वीं के बाद हम दोनों अलग-अलग स्कूलों में चले गए।
न नंबर, न कॉन्टेक्ट।
बस यादें…
मैंने कई बार सोशल मीडिया पर उसे ढूँढा।
लेकिन वह कहीं नहीं मिली।
धीरे-धीरे मैं भी जिंदगी में आगे बढ़ गया।
लेकिन वह मासूम सी मुस्कान?
वो आज भी दिल में जिंदा है।
क्या एकतरफा प्यार भी सच्चा होता है?
मैंने कभी उसे I Love You नहीं कहा।
लेकिन उसे हर दिन दिल से चाहा।
उसकी हर खुशी के लिए दुआ की।
कभी उसे परेशान नहीं किया।
कभी उसकी राह नहीं रोकी।
तो क्या ये प्यार नहीं था?
शायद था…
शायद बहुत ज्यादा था।
और इसलिए आज भी,
जब अकेला बैठता हूँ,
तो वह चेहरा याद आ जाता है।
हाँ…
Ek Tarfa Pyar Story in Hindi भी
पूरी तरह सच्ची होती है।
भाग-2 में पढ़ें:
“सालों बाद हमारी मुलाक़ात… क्या फिर से कुछ जुड़ पाया?”

Very nice story