Meenu love story

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गांव की मिट्टी में पला-बढ़ा, ये प्यार बड़ा ही इमोशनल और रियल फील होता है—सीधा दिल को छूने वाला

गांव की लव स्टोरी – मिट्टी की खुशबू वाला प्यार

गांव की गलियों में पनपी मोहब्बत की बात ही अलग है, यार। मिठास ऐसी कि शहर की कहानियां फेल। ये किस्सा भी कुछ ऐसा ही है—चंदपुर गांव का। चारों तरफ हरियाली, नदी-तालाब और आम के पेड़ों की कतारें। लोग सीधे-सपाट, दिल के साफ। इन्हीं में एक था मोहन—मास्टरजी। सीधा-सादा, थोड़ा शर्मीला, गांव के स्कूल में बच्चों को पढ़ाता था। किताबें ठीक हैं, मगर असली प्यार तो उसे मिट्टी की खुशबू से था।

अब कहानी में एंट्री होती है गौरी की। कुछ महीने पहले ही अपने परिवार के साथ आई थी—उसके पापा डॉक्टर, थोड़ा रौबदार टाइप। गौरी दिखने में कमाल, पढ़ाई में तेज, और शहर के खुले माहौल की आदी। मगर गांव की सादगी में उसने जल्दी खुद को ढाल लिया। कभी तालाब पे कपड़े धोती, कभी बाग में आम तोड़ती, कभी खेतों में घूमती—एकदम देसी हो गई थी।

मोहन की तो पहली बार मंदिर में नजर पड़ी थी उस पर। क्या मुस्कान थी, मानो सारी चिंता हवा हो जाए। बेचारा मोहन देखते ही रह गया, बात करने की हिम्मत ही नहीं जुटी। उसके दिल में कुछ-कुछ होने लगा, मगर ज़ुबान पर ताला। गांव के माहौल में वैसे भी लड़का-लड़की का खुल के मिलना, अरे भाई, आसान कहाँ होता है?

फिर किस्मत ने जुगाड़ लगाया। एक दिन स्कूल में टीचरों की कमी पड़ गई, तो गौरी बच्चों को पढ़ाने आ गई। मोहन वहीं पहले से था। दोनों ने काम के बहाने खूब बातें कीं, कभी क्लास में, कभी स्कूल के मैदान में। मोहन को गौरी की सादगी भा गई, गौरी को मोहन की ईमानदारी और सीधा दिल। कब दोस्ती प्यार में बदल गई, खुद को भी पता नहीं चला।

फिर आया असली ट्विस्ट—मोहन ने हिम्मत की और गौरी को तालाब के पास बुलाया। सूरज ढल रहा था, पानी में चमकती सुनहरी लकीरें। मोहन की आवाज़ कांप रही थी, “गौरी, मैं दिल से प्यार करता हूं। कोई फालतू की बात नहीं, बिल्कुल सच्चा प्यार है।” गौरी पहले चुप, फिर मुस्कुरा के बोली, “मोहन, मैं भी तुम्हारे बिना अधूरी हूं।” भाई, मोहन की तो आंखें ही भीग गईं।

लेकिन, कहानी इतनी सीधी कहाँ थी? गौरी के घरवालों को मोहन पसंद नहीं आया—न पैसा, न कोई बड़ा खानदान। उन्होंने साफ मना कर दिया। गौरी भी अड़ गई, बोली, “अगर जरूरत पड़ी तो सबके खिलाफ जाऊंगी, मगर मोहन का साथ नहीं छोड़ूंगी।” मोहन ने कहा, “नहीं, सबका आशीर्वाद चाहिए। भाग के शादी नहीं करेंगे।”

मोहन ने खुद को साबित करने की ठान ली। दिन-रात मेहनत की, बच्चों के लिए लाइब्रेरी शुरू की, और खेती में नए तरीके अपनाए। गांववाले अब उसकी इज्जत करने लगे। धीरे-धीरे गौरी के घरवालों का मन भी पिघलने लगा। आखिर एक दिन बुलाया और बोले, “अब भरोसा है, तुम हमारी बेटी का ख्याल रख सकते हो।”

फिर क्या, गांव में धूमधाम से शादी हुई। सबने आशीर्वाद दिया। शादी के दिन मोहन बोला, “तुम्हारे बिना मैं अधूरा था, तुम्हारे प्यार ने मुझे मजबूत बनाया।” गौरी हंस के बोली, “हमारा प्यार गांव की मिट्टी जैसा है, इसकी खुशबू कभी खत्म नहीं होगी।” बस, Chandpur में एक नई लव स्टोरी बन गई।

सच्चा प्यार – वही जो हर मुश्किल में साथ दे। मोहन-गौरी की कहानी तो बस मिसाल है, भाई। साफ दिल, पक्के इरादे, और थोड़ा जिद – यही काफी है। असली जिंदगी की लव स्टोरी!

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