कैंपस की गलियों में छिपी एक अधूरी कहानी
जब सालों बाद वो फिर मिली… लेकिन हालात बदल चुके थे…
समय का पहिया कभी किसी के लिए नहीं रुकता।
कभी हम यादों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना चाहते हैं,
और कभी यादें हमें छोड़ने को तैयार ही नहीं होतीं।
रवि की जिंदगी भी कुछ ऐसी ही थी।
कॉलेज के वो दिन… वो हँसी… वो बरगद का पेड़…
सभी किसी पुराने अल्बम के पीले पड़े पन्नों की तरह यादों में सिमट गए थे।
नौकरी, ज़िम्मेदारियाँ, भाग-दौड़—
रोजमर्रा की जिंदगी ने उसे इतना व्यस्त कर दिया था
कि उसने खुद से समझौता कर लिया था कि
कुछ कहानियाँ अधूरी ही अच्छी होती हैं।
पर किस्मत की लिखी कहानियों में मोड़ अक्सर तब आते हैं
जब इंसान मोड़ की उम्मीद ही छोड़ चुका होता है।
अचानक वो पल—जब एक चेहरा सालों पुरानी धड़कनें लौटा लाया
एक शाम रवि ऑफिस से लौट रहा था।
मेट्रो की भीड़ हमेशा की तरह भारी थी,
लेकिन आज उसकी नज़र एक चेहरे पर जाकर अटक गई।
वही मासूमियत… वही आँखें… वही मुस्कान…
बस अब उनमें थोड़ी परिपक्वता और हल्की थकान थी।
वो मीरा थी।
वही मीरा जिसे उसने खो दिया था…
वही मीरा जिसे उसने कभी भुलाया नहीं था।
कुछ सेकंडों तक रवि उसे देखता रह गया—
जैसे किसी ने बीते सालों को अचानक rewind कर दिया हो।
मीरा ने भी उसे देखा…
और हल्के से मुस्कुरा दी।
“रवि?”
उस आवाज़ में वो पुराना अपनापन अभी भी जिंदा था।
रवि ने धीमे से कहा—
“मीरा…”
कुछ पलों की खामोशी थी,
लेकिन इस खामोशी में सवाल भी थे और जवाब भी।
कैफ़े की मेज़ पर दो अधूरी कहानियाँ आमने-सामने बैठीं
मीरा ने पूछा—
“कॉफी पीओगे?”
रवि ने हाँ कर दी।
शायद उसका दिल भी इस मुलाकात का इंतज़ार कर रहा था।
कैफ़े छोटा था, लेकिन उस शाम वहाँ की फिज़ा भारी थी।
दोनो के बीच चुप्पियाँ थीं,
और उन चुप्पियों में बीता हुआ पूरा कॉलेज छिपा हुआ था।
रवि ने पूछा—
“कहाँ चली गई थी इतने साल?”
मीरा ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—
“ज़िंदगी ने अलग रास्ते दे दिए थे। सोचा था सब भूल जाऊँगी…
पर कुछ लोग यादों में बस जाते हैं।”
उसका यह कहना रवि के दिल को कहीं छू गया।
पुरानी यादें… पुराने पन्ने… और वो सवाल जो कभी पूछे नहीं गए थे
कॉफी के बीच दोनों पुराने दिनों की बातें करने लगे—
कैंपस का बरगद, प्रोजेक्ट की रातें,
पहली बहस, पहली नज़र,
वो कागज़ पर बनाए गए अधूरे sketches…
सब एक-एक करके लौट आए।
मीरा ने धीरे से पूछा—
“तुमने वो नोटबुक संभालकर रखी?”
रवि ने गर्दन झुका ली—
“हर पन्ना अभी भी वैसा ही है।”
मीरा ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा—
“और तुम? कैसे हो?”
रवि कुछ बोल पाता उससे पहले मीरा ने खुद ही कहा—
“शादी हो गई थी… लेकिन अब अकेली हूँ।”
“सब मिला… बस सुकून नहीं मिला।”
रवि के पास शब्द खत्म हो गए थे।
कभी-कभी प्यार वहीं लौट आता है
जहाँ आपने उसे छोड़ा था—बस हालात बदल जाते हैं।
कैंपस वापसी—जहाँ कहानी शुरू हुई थी
मीरा ने बताया कि वो कभी उस कैंपस वापस नहीं गई।
बहुत सारी यादें थीं वहाँ… बहुत सारा दर्द भी।
रवि ने कहा—
“चलो चलते हैं।”
मीरा ने पहले इंकार किया…
फिर उसकी आँखों में कुछ ऐसा था
जिसने उसे हाँ कहने पर मजबूर कर दिया।
शाम ढल रही थी जब दोनों फिर पुराने कॉलेज के गेट पर पहुँचे।
कैंपस बदल चुका था—
नई दीवारें, नए स्टूडेंट्स, नई चहल-पहल।
लेकिन बरगद का पेड़
आज भी वहीं खड़ा था,
उनकी तरह ही—यादों में डूबा हुआ।
मीरा उसे देखते ही ठिठक गई।
आँखें नम हो गईं।
वो पन्ना जो कभी पूरा नहीं हुआ था… आज पूरा हो गया
रवि ने अपनी जेब से वो पुरानी नोटबुक निकाली।
धूल लगी हुई, किनारे पुराने,
पर उसके अंदर की भावनाएँ बिल्कुल ताज़ा थीं।
“ये तुम्हारी है।”
उसने नोटबुक मीरा की ओर बढ़ाई।
मीरा ने अंतिम पन्ना खोला—
उस पर लिखा था:
“कभी वक्त मिले तो उस कैंपस में लौट आना,
जहाँ ज़िंदगी ने पहली बार मोहब्बत का एहसास करवाया था…”
मीरा रो पड़ी…
लेकिन उसकी मुस्कान बता रही थी कि वो रोना राहत का था।
“तुमने आज वो आख़िरी पन्ना पूरा कर दिया, रवि…”
रवि ने धीरे से कहा—
“ये कहानी तुम्हारी थी… मैं बस आख़िरी पन्ना लिखने आया हूँ।”
हवा चली… बरगद के पत्ते गिरे…
और नोटबुक के पन्ने हवा में उड़ने लगे—
जैसे कहानी खुद को आज़ाद कर रही हो।
कुछ रिश्ते वक्त से आगे निकल जाते हैं
कुछ देर की खामोशी के बाद
मीरा ने धीरे से कहा—
“कुछ रिश्ते वक्त से हारते नहीं…
बस वक्त से आगे निकल जाते हैं।”
रवि ने मुस्कुराकर जवाब दिया—
“और कुछ कहानियाँ ख़त्म नहीं होतीं…
बस वहीं रुक जाती हैं जहाँ दिल उन्हें रोक लेता है।”
मीरा ने उसकी ओर आख़िरी बार देखा,
हल्की मुस्कान दी,
और भीड़ में खो गई—
ज़िंदगी के किसी नए मोड़ की तरफ।
रवि बरगद के नीचे बैठ गया।
सूरज डूब रहा था,
और हवा में वही पुरानी खुशबू थी—
जो कभी मीरा के साथ कॉलेज के दिनों में महसूस होती थी।
उसने आसमान को देखते हुए धीरे से कहा—
“कुछ मोहब्बतें वक्त नहीं मिटा पाता…
वो दिल के किसी कोने में सहेज ली जाती हैं—
जैसे कैंपस की गलियों में छिपी एक अधूरी कहानी…”
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